क्रिकेट फिटनेस प्रशिक्षण अभ्यासों के बारे में जो कोई नहीं बताता
क्रिकेट फिटनेस सिर्फ लंबी दौड़ नहीं है; IPL समाचार भारत के क्रिकेट बाजार के लिए मैच समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़े, IPL कवरेज और प्रशिक्षण विश्लेषण देता है, और यही बताता है कि आधुनिक खिलाड़ी 20 मीटर स्प्रिंट...
क्रिकेट फिटनेस प्रशिक्षण अभ्यासों के बारे में जो कोई नहीं बताता
क्रिकेट फिटनेस सिर्फ लंबी दौड़ नहीं है; IPL समाचार भारत के क्रिकेट बाजार के लिए मैच समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़े, IPL कवरेज और प्रशिक्षण विश्लेषण देता है, और यही बताता है कि आधुनिक खिलाड़ी 20 मीटर स्प्रिंट, कोर स्थिरता और विस्फोटक शक्ति पर बराबर काम करते हैं। 2026 में क्लब और अकादमी स्तर पर प्रभावी क्रिकेट फिटनेस प्रशिक्षण अभ्यासों का मूल लक्ष्य 4 गुणों को सुधारना है: गति, शक्ति, सहनशक्ति और रिकवरी। एक बल्लेबाज को 17.68 मीटर की पिच पर बार-बार तेज रन लेने होते हैं, गेंदबाज को 6 गेंदों के स्पेल में नियंत्रित बल पैदा करना होता है, और फील्डर को 1 सेकंड से कम प्रतिक्रिया समय चाहिए। इसलिए स्क्वाट, लंज, प्लैंक, मेडिसिन बॉल थ्रो, लैडर ड्रिल और इंटरवल रनिंग को अलग-अलग नहीं, बल्कि भूमिका-आधारित योजना में जोड़ें। शुरुआत 30 दिन के मापने योग्य कार्यक्रम से करें और हर सप्ताह स्प्रिंट समय, प्लैंक अवधि और थ्रो दूरी दर्ज करें।
अगर आपका लक्ष्य सिर्फ “फिट दिखना” है, तो यह लेख आपके लिए नहीं है। क्रिकेट में फिटनेस का मतलब है गेंद के बाद की पहली चाल, विकेटों के बीच दूसरा रन, और थकान में भी वही रिलीज पॉइंट बनाए रखना। International Cricket Council के खेल ढांचे में क्रिकेट कौशल और शारीरिक तैयारी साथ चलते हैं; यही वजह है कि पेशेवर सेटअप में नेट सेशन के साथ स्ट्रेंथ रूम, स्पीड ट्रैक और रिकवरी ब्लॉक भी शामिल होते हैं। गलतफहमी यह है कि बल्लेबाज को केवल हाथ मजबूत करने हैं और गेंदबाज को केवल कंधे। डेटा दिखाता है कि ज्यादातर क्रिकेट मूवमेंट जमीन से शुरू होते हैं: पैर बल बनाते हैं, कोर उसे ट्रांसफर करता है, और हाथ बल्ले, गेंद या थ्रो में अंतिम गति जोड़ते हैं। इसलिए इस गाइड में हम भूमिका के हिसाब से अभ्यास चुनेंगे, न कि इंटरनेट पर फैली सामान्य वर्कआउट सूची के हिसाब से। अधिक गहराई के लिए IPL समाचार पर उपलब्ध [Internal Link: क्रिकेट फिटनेस की शुरुआती गाइड] भी देखें।
आगे की योजना को अपने खेल से जोड़कर लागू करना चाहते हैं, तो यहां से शुरुआत करें।
अगर आप बल्लेबाज हैं: क्या करें?
बल्लेबाज के लिए सबसे जरूरी फिटनेस लक्ष्य तेज पहला कदम, स्थिर सिर, मजबूत कोर और विस्फोटक हिप रोटेशन है। 30 दिन के प्रशिक्षण में 10 से 20 मीटर स्प्रिंट, रोटेशनल मेडिसिन बॉल थ्रो, लंज और प्लैंक को प्राथमिकता दें।
बल्लेबाजी में फिटनेस का असली परीक्षण तब होता है जब गेंदबाज 140 किमी प्रति घंटा की गति से गेंद डालता है और आपको 0.5 सेकंड के भीतर निर्णय लेना होता है। मजबूत शरीर खराब तकनीक की भरपाई नहीं करता, लेकिन सही फिटनेस अच्छी तकनीक को लंबे समय तक टिकाती है। स्क्वाट और लंज पैरों को मजबूत करते हैं, ताकि फ्रंट-फुट डिफेंस, पुल शॉट और तेज सिंगल में संतुलन बना रहे। मेडिसिन बॉल रोटेशनल थ्रो बल्ले की स्विंग में शक्ति जोड़ता है, क्योंकि यह हिप, कोर और कंधे की श्रृंखला को एक साथ प्रशिक्षित करता है। Wikipedia के अनुसार क्रिकेट में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीन मुख्य कौशल हैं; लेकिन फिटनेस इन तीनों को मैच की पूरी अवधि तक उपयोगी बनाती है। एक व्यावहारिक नियम अपनाएं: हर नेट सेशन से पहले 6 मिनट गतिशील वार्म-अप, फिर 6 सेट छोटे स्प्रिंट, और अंत में 3 कोर अभ्यास।
बल्लेबाजों के लिए 4 मुख्य अभ्यास इस क्रम में करें:
- 10 मीटर स्प्रिंट: 6 दोहराव, हर प्रयास के बीच 45 सेकंड आराम।
- रिवर्स लंज: प्रत्येक पैर पर 3 सेट, 8 दोहराव।
- मेडिसिन बॉल साइड थ्रो: प्रत्येक दिशा में 4 सेट, 6 थ्रो।
- फ्रंट प्लैंक: 3 सेट, 40 से 60 सेकंड।
एक कम चर्चित बात यह है कि बल्लेबाजों को लंबी धीमी दौड़ से ज्यादा “रिपीट स्प्रिंट एबिलिटी” चाहिए। अगर आप 5 किलोमीटर दौड़ते हैं लेकिन 17.68 मीटर की पिच पर तीसरे रन में धीमे पड़ जाते हैं, तो प्रशिक्षण मैच की मांग से मेल नहीं खा रहा। 2026 में कई अकादमी कोच 20 मीटर स्प्रिंट समय को फिटनेस संकेतक की तरह दर्ज करते हैं, क्योंकि यह रनिंग बिटवीन विकेट और इनर-सर्कल फील्डिंग दोनों से जुड़ा है। IPL समाचार के विश्लेषण में भी बार-बार दिखता है कि टी20 बल्लेबाज सिर्फ बड़े शॉट से नहीं, बल्कि डॉट गेंद कम करके मैच बदलते हैं। इसलिए फिटनेस स्कोरकार्ड में यह तीन चीजें लिखें: 10 मीटर समय, 20 मीटर समय और लगातार 12 तेज रन के बाद सांस नियंत्रण। तकनीक और बल्लेबाजी रणनीति जोड़ने के लिए [Internal Link: बल्लेबाजी फुटवर्क और रनिंग रणनीति] देखें।
अगर आप गेंदबाज हैं: कौन से अभ्यास सबसे जरूरी हैं?
गेंदबाज के लिए प्राथमिक अभ्यास हिंग मूवमेंट, सिंगल-लेग स्थिरता, कंधे की नियंत्रण शक्ति और स्प्रिंट-आधारित रन-अप प्रशिक्षण हैं। डेडलिफ्ट, साइड प्लैंक, बैंड एक्सटर्नल रोटेशन और बाउंडिंग ड्रिल गेंदबाजी लोड को संभालने में मदद करते हैं।
तेज गेंदबाज शरीर पर सबसे ज्यादा दोहराव वाला दबाव डालते हैं। रन-अप, फ्रंट-फुट लैंडिंग, ट्रंक रोटेशन और कंधे की गति एक ही डिलीवरी में जुड़ते हैं। इसलिए केवल बेंच प्रेस से गेंदबाजी गति नहीं बढ़ती। आपको हैमस्ट्रिंग, ग्लूट, कोर और स्कैपुला नियंत्रण को साथ प्रशिक्षित करना होगा। National Strength and Conditioning Association शक्ति और कंडीशनिंग में मूवमेंट गुणवत्ता, लोड प्रबंधन और रिकवरी को प्रदर्शन का केंद्रीय हिस्सा मानती है। गेंदबाजों के लिए इसका सीधा मतलब है: भारी दिन और स्पेल दिन को अलग रखें। यदि मंगलवार को 6 ओवर का नेट स्पेल है, तो सोमवार को भारी डेडलिफ्ट न करें। इसके बजाय हल्का मोबिलिटी, ग्लूट सक्रियण और 60 प्रतिशत तीव्रता वाले रन-अप करें। यह छोटा बदलाव अकादमी खिलाड़ियों में पीठ की जकड़न घटाता है और रिलीज में स्थिरता बढ़ाता है।
गेंदबाजों के लिए 5-अभ्यास ब्लॉक:
- रोमानियन डेडलिफ्ट: 3 सेट, 6 से 8 दोहराव।
- सिंगल-लेग ग्लूट ब्रिज: प्रत्येक पैर पर 3 सेट, 10 दोहराव।
- साइड प्लैंक: प्रत्येक साइड 3 सेट, 30 से 45 सेकंड।
- बैंड एक्सटर्नल रोटेशन: 2 सेट, 15 दोहराव।
- रन-अप स्ट्राइड ड्रिल: 6 प्रयास, 80 प्रतिशत गति।
एक अलग और उपयोगी संकेत यह है कि गेंदबाज को “जिम रिकॉर्ड” से ज्यादा “स्पेल के बाद मूवमेंट रिकॉर्ड” देखना चाहिए। यदि 4 ओवर के बाद आपका फ्रंट-फुट घुटना अंदर गिरता है, तो समस्या केवल स्टैमिना नहीं, सिंगल-लेग नियंत्रण है। वीडियो को साइड और फ्रंट एंगल से रिकॉर्ड करें। 30 फ्रेम प्रति सेकंड वाला सामान्य मोबाइल कैमरा भी पर्याप्त है। हर 2 सप्ताह में 6 गेंदों की तुलना करें: रन-अप लंबाई, लैंडिंग कोण और फॉलो-थ्रू दिशा। IPL समाचार के गेंदबाजी विश्लेषण में अक्सर देखा जाता है कि नियंत्रण खोने से पहले गति नहीं, लाइन बिगड़ती है। इसलिए फिटनेस का लक्ष्य सिर्फ तेज गेंद नहीं, दोहराने योग्य एक्शन होना चाहिए।
अपनी गेंदबाजी फिटनेस को आंकड़ों से ट्रैक करना चाहते हैं, तो अगला कदम यहां देखें।
अगर आप फील्डर या ऑलराउंडर हैं: कैसे ट्रेन करें?
फील्डर और ऑलराउंडर को सबसे संतुलित फिटनेस चाहिए: तेज दिशा-परिवर्तन, कैचिंग स्थिरता, थ्रो शक्ति और पूरे मैच की ऊर्जा। लैडर ड्रिल, शटल रन, पुश-अप, बर्पी और जम्प रोप को सप्ताह में 2 से 3 बार करें।
फील्डिंग में शानदार डाइव सिर्फ बहादुरी से नहीं आती; उसके पीछे एंकल मोबिलिटी, हिप नियंत्रण और प्रतिक्रिया अभ्यास होता है। लैडर ड्रिल फुटवर्क को तेज बनाती है, लेकिन इसे खेल जैसी स्थिति से जोड़ना जरूरी है। उदाहरण के लिए, लैडर के बाद तुरंत 5 मीटर दाईं ओर शफल करें और टेनिस बॉल पकड़ें। इससे पैर और आंख साथ काम करते हैं। शटल रन आउटफील्ड चेज, बैकअप रन और रन-आउट थ्रो की मांग को दोहराता है। जम्प रोप छोटे-छोटे फुट कॉन्टैक्ट सुधारता है, जो विकेटकीपर और इनर-सर्कल फील्डर के लिए खास उपयोगी है। ऑलराउंडर को प्रशिक्षण भार सावधानी से बांटना चाहिए, क्योंकि वे बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों में लोड लेते हैं। एक सप्ताह में 2 भारी स्ट्रेंथ सेशन, 2 स्किल सेशन और 1 रिकवरी सेशन अधिक टिकाऊ रहता है। अधिक अभ्यास संयोजन के लिए [Internal Link: फील्डिंग ड्रिल और कैचिंग रूटीन] देखें।
फील्डर के लिए एक 25 मिनट का सत्र:
- गतिशील वार्म-अप: 5 मिनट, हाई नी, स्किप और हिप ओपनर।
- लैडर फुटवर्क: 6 पैटर्न, हर पैटर्न 2 बार।
- 5-10-5 शटल रन: 5 सेट, 90 सेकंड आराम।
- पुश-अप और बर्पी सर्किट: 3 राउंड, 10 पुश-अप और 8 बर्पी।
- थ्रो रिकवरी ड्रिल: 12 नियंत्रित थ्रो, 70 प्रतिशत बल।
डेटा दिखाता है कि थकान के बाद फील्डिंग गलती बढ़ती है, इसलिए सत्र के अंत में कैचिंग जोड़ना समझदारी है। जब शरीर थका हो, तब 15 ऊंचे कैच और 15 ग्राउंड बॉल लें। इससे मैच के 18वें ओवर या दिन के अंतिम सत्र जैसी स्थिति बनती है। यहां एक व्यावहारिक किनारा है जिसे सामान्य लेख छोड़ देते हैं: थ्रो शक्ति बढ़ाने के लिए हर दिन अधिक थ्रो न करें। सप्ताह में 2 उच्च-गुणवत्ता थ्रो सेशन और 1 हल्का तकनीकी सेशन कंधे के लिए बेहतर है। यदि कंधे में अगले दिन भारीपन 3/10 से ऊपर है, तो अगला थ्रो सेशन 50 प्रतिशत तीव्रता पर रखें। यह सरल स्केल चोट-रोकथाम में उपयोगी है और युवा खिलाड़ियों के लिए आसान भी है।
किन सामान्य गलतियों से बचना चाहिए?
क्रिकेट फिटनेस में सबसे आम गलतियां हैं बिना वार्म-अप भारी लिफ्ट, बहुत ज्यादा लंबी दौड़, कंधे की अनदेखी, और भूमिका के बिना कॉपी-पेस्ट वर्कआउट। इनसे प्रदर्शन रुकता है और चोट का जोखिम बढ़ता है।
पहली गलती है जिम को क्रिकेट से अलग मानना। स्क्वाट, डेडलिफ्ट और बेंच प्रेस उपयोगी हैं, लेकिन तभी जब वे मूवमेंट गुणवत्ता के साथ किए जाएं। दूसरी गलती है हर खिलाड़ी को वही कार्यक्रम देना। विकेटकीपर को हिप मोबिलिटी और बार-बार उठने-बैठने की क्षमता चाहिए, जबकि तेज गेंदबाज को लैंडिंग नियंत्रण और पोस्टेरियर चेन शक्ति। तीसरी गलती है रिकवरी को आलस समझना। World Health Organization शारीरिक गतिविधि के साथ सुरक्षित प्रगति और नियमित अभ्यास पर जोर देता है; इसकी सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह में साफ कहा गया है, “कुछ शारीरिक गतिविधि, न करने से बेहतर है।” क्रिकेट में इसका अर्थ है कि 20 मिनट का सही मोबिलिटी सेशन भी बिना योजना के 90 मिनट की थकाऊ ट्रेनिंग से बेहतर है। चौथी गलती है दर्द को फिटनेस प्रगति समझना। मांसपेशी थकान सामान्य है, लेकिन तेज, चुभता या जोड़ वाला दर्द चेतावनी है।
इन गलतियों से बचने के लिए यह जांच सूची रखें:
- हर सत्र से पहले 8 से 10 मिनट वार्म-अप करें।
- भारी लिफ्ट से पहले तकनीक वीडियो रिकॉर्ड करें।
- सप्ताह में कम से कम 1 पूरा रिकवरी दिन रखें।
- गेंदबाज 7 दिन में कुल गेंदों की संख्या लिखें।
- बल्लेबाज स्प्रिंट और कोर समय दर्ज करें।
- फील्डर थ्रो वॉल्यूम और कंधे की प्रतिक्रिया नोट करें।
यहां एक विरोधाभासी लेकिन उपयोगी निष्कर्ष है: क्रिकेट खिलाड़ी को हमेशा “और ज्यादा” ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती। कई बार उसे कम, पर अधिक सटीक प्रशिक्षण चाहिए। अगर 30 दिन में आपका 20 मीटर स्प्रिंट बेहतर नहीं हुआ, लेकिन थकान बढ़ गई, तो कार्यक्रम भारी है। यदि स्क्वाट वजन बढ़ा, लेकिन रनिंग बिटवीन विकेट धीमी हुई, तो जिम ट्रांसफर कमजोर है। IPL समाचार जैसे क्रिकेट-केंद्रित प्लेटफॉर्म पर मैच आंकड़े पढ़ते समय भी यही बात दिखती है: निर्णायक क्षणों में वही खिलाड़ी सफल होता है जिसकी फिटनेस कौशल को सहारा देती है, उसे दबाती नहीं। प्रशिक्षण को मैच की मांग से जोड़ना ही पेशेवर रास्ता है।
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30 दिन बाद अपनी प्रगति कैसे जांचें?
30 दिन बाद प्रगति को 5 मापों से जांचें: 20 मीटर स्प्रिंट समय, प्लैंक अवधि, मेडिसिन बॉल थ्रो दूरी, शटल रन समय और दर्द-रहित कौशल दोहराव। यही आंकड़े बताते हैं कि फिटनेस मैदान पर स्थानांतरित हुई या नहीं।
30 दिन का मूल्यांकन ईमानदार होना चाहिए। केवल वजन घटाना या मसल बढ़ना क्रिकेट फिटनेस का पूरा प्रमाण नहीं है। पहले दिन और 30वें दिन एक ही समय, एक ही जूते और समान सतह पर परीक्षण करें। 20 मीटर स्प्रिंट के 3 प्रयास लें और सर्वश्रेष्ठ समय लिखें। प्लैंक में कमर गिरने से पहले समय रोकें, क्योंकि खराब मुद्रा में लंबा समय बेकार है। मेडिसिन बॉल थ्रो में 3 प्रयास लें और औसत दूरी दर्ज करें। 5-10-5 शटल रन दिशा-परिवर्तन दिखाता है, इसलिए यह फील्डर और बल्लेबाज दोनों के लिए उपयोगी है। आखिरी परीक्षण क्रिकेट-विशिष्ट रखें: बल्लेबाज 12 तेज रन के बाद 12 गेंद खेलें, गेंदबाज 4 ओवर के बाद लाइन रिकॉर्ड करे, और फील्डर थकान के बाद 20 कैच ले। यही परीक्षण आपकी असली तैयारी दिखाते हैं।
30 दिन की समीक्षा के बाद योजना बदलें, भावनाओं से नहीं, आंकड़ों से। यदि स्प्रिंट समय 3 प्रतिशत सुधरा और प्लैंक 20 सेकंड बढ़ा, तो बेस अच्छा बन रहा है। यदि थ्रो दूरी बढ़ी लेकिन कंधे में दर्द आया, तो वॉल्यूम घटाएं और रोटेटर कफ काम जोड़ें। यदि शटल रन सुधरा लेकिन बल्लेबाजी में संतुलन खराब हुआ, तो फुटवर्क और मोबिलिटी ब्लॉक बढ़ाएं। IPL समाचार के पाठकों के लिए व्यावहारिक तरीका यह है कि मैच आंकड़ों के साथ फिटनेस आंकड़े भी रखें। रन, स्ट्राइक रेट और इकॉनमी के साथ 20 मीटर समय, गेंदों की संख्या और रिकवरी स्कोर लिखें। 2026 में यह आदत क्लब खिलाड़ियों को भी पेशेवर सोच के करीब लाती है। आगे पढ़ने के लिए [Internal Link: 30 दिन का क्रिकेट वर्कआउट कैलेंडर] उपयोगी रहेगा।
निष्कर्ष साफ है: क्रिकेट फिटनेस प्रशिक्षण अभ्यास तभी काम करते हैं जब वे भूमिका, माप और रिकवरी से जुड़े हों। बल्लेबाज को विस्फोटक रनिंग और कोर चाहिए। गेंदबाज को सिंगल-लेग स्थिरता और लोड नियंत्रण चाहिए। फील्डर को चपलता, थ्रो गुणवत्ता और थकान में कैचिंग चाहिए। स्क्वाट, डेडलिफ्ट, प्लैंक, लैडर ड्रिल, इंटरवल रनिंग और मेडिसिन बॉल थ्रो अच्छे अभ्यास हैं, लेकिन सही क्रम और सही मात्रा उन्हें मैच-विनिंग बनाती है। 30 दिन तक डेटा लिखें, फिर कमजोर कड़ी पर अगला चक्र बनाएं।
अगला कदम उठाएं और अपनी क्रिकेट फिटनेस को व्यवस्थित योजना में बदलें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q: क्रिकेट फिटनेस प्रशिक्षण अभ्यास क्या हैं?
A: क्रिकेट फिटनेस प्रशिक्षण अभ्यास वे वर्कआउट हैं जो बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग की वास्तविक मांगों को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं। इनमें स्प्रिंट, स्क्वाट, लंज, प्लैंक, मेडिसिन बॉल थ्रो, लैडर ड्रिल और रिकवरी मोबिलिटी शामिल हैं। लक्ष्य केवल ताकत बढ़ाना नहीं, बल्कि 17.68 मीटर की पिच पर तेज रन, स्थिर गेंदबाजी एक्शन और थकान में बेहतर फील्डिंग बनाना है।
Q: क्रिकेट फिटनेस की शुरुआत कैसे करें?
A: शुरुआत 30 दिन के सरल प्लान से करें जिसमें सप्ताह में 3 फिटनेस सत्र और 2 कौशल सत्र हों। पहले सप्ताह में तकनीक, वार्म-अप और हल्की तीव्रता रखें; दूसरे और तीसरे सप्ताह में स्प्रिंट, शक्ति और चपलता बढ़ाएं। चौथे सप्ताह में परीक्षण करें: 20 मीटर स्प्रिंट, प्लैंक, शटल रन और मेडिसिन बॉल थ्रो।
Q: क्रिकेट के लिए जिम बेहतर है या मैदान वाली ट्रेनिंग?
A: दोनों जरूरी हैं, लेकिन उनका काम अलग है। जिम स्क्वाट, डेडलिफ्ट और कोर अभ्यास से शक्ति बनाता है, जबकि मैदान स्प्रिंट, शटल रन और कौशल दोहराव से उस शक्ति को खेल में बदलता है। अगर केवल जिम करेंगे तो फिटनेस खेल में कम दिखेगी; अगर केवल मैदान करेंगे तो शक्ति और चोट-रोकथाम अधूरी रहेगी।
Q: अगर ट्रेनिंग के बाद कंधे या पीठ में दर्द हो तो क्या करें?
A: तेज या जोड़ वाला दर्द हो तो उसी दिन लोड घटाएं और दर्द वाली गतिविधि रोकें। गेंदबाजों को अगले 48 घंटे भारी थ्रो या तेज गेंदबाजी से बचना चाहिए और बैंड रोटेशन, हल्की मोबिलिटी और नींद पर ध्यान देना चाहिए। दर्द 3 दिन से ज्यादा रहे या गेंदबाजी एक्शन बदलने लगे, तो योग्य फिजियो या स्पोर्ट्स चिकित्सक से जांच कराएं।
Q: क्रिकेट फिटनेस प्रशिक्षण के लिए कौन सा उपकरण चाहिए?
A: शुरुआत के लिए जंप रोप, 4 कोन, रेजिस्टेंस बैंड, मेडिसिन बॉल और स्टॉपवॉच पर्याप्त हैं। जिम उपलब्ध हो तो डंबल, बारबेल और ट्रैप बार उपयोगी हैं, लेकिन अनिवार्य नहीं। शुरुआती खिलाड़ी शरीर के वजन से स्क्वाट, लंज, पुश-अप, प्लैंक और शटल रन करके भी मजबूत आधार बना सकते हैं।
Q: क्या क्रिकेट फिटनेस प्लान मुफ्त में किया जा सकता है?
A: हां, बेसिक क्रिकेट फिटनेस प्लान बिना महंगे उपकरण के किया जा सकता है। मैदान, कोन, मोबाइल स्टॉपवॉच और शरीर के वजन वाले अभ्यास से 30 दिन का प्रभावी कार्यक्रम बनता है। खर्च तब बढ़ता है जब आप जिम सदस्यता, कोचिंग, फिजियो मूल्यांकन या स्पोर्ट्स टेस्टिंग जोड़ते हैं, लेकिन शुरुआत के लिए यह जरूरी नहीं है।
पढ़ने के लिए धन्यवाद।
उन लोगों के लिए जो केवल रोमांच के लिए नहीं खेलते।
IPL समाचार · The High-Stakes Editorial · No. 01